August 15th, 2010
श्री सिध्दाता आश्रम श्री लक्ष्मी नारायण दिव्य धाम में महाशिवरात्रि पर्व पर गोमुख गंगोत्री ब्रिजधार और हरद्वार से कावड के जरिये पवित्र गंगा जल लाकर भगवान भोले शंकर का अभिषेक किया। २३० कावडियो तथा हजारों भक्तों ने आचार्य मधुसुदनाचार्य जी के साथ सबसे पहले भगवान शंकर का पंचामृत से अभिषेक किया और कावडियो ने गंगा जल से अभिषेक किया।
जगतगुरु स्वामी श्री पुर्षोत्मचार्य जी महाराज ने इस अवसर पर अपने श्री वचनों के रूप में कहा कि सभी भक्तों को आपसी प्रेम सहनशीलता के साथ जीवन जीना चाहिए । हमें श्री शिव परिवार से सीख लेनी चाहिए। भगवान भोले शंकर मरघटों में रहने वाले भस्मी रचाने वाले है और माँ पार्वती विपुर सुंदरी और उनमे कोई द्वेष नहीं है । हमे भी शिव परिवार का अव्लंन्बन कर जीवन यापन करना चाहिए और किसी से द्वेष, कलेश नहीं करना चाहिए।
इसके उपरांत भक्तों ने भंडारे में भोजन प्रशाद पाया।
जय गुरु देव
जय भोले
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August 13th, 2010
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July 7th, 2010
चावड़ी बाजार गद्दी के वार्षिकोत्सव पर इन्द्रप्रस्थ एवं हरियाणा पीठाधीश्वर जगदगुरु रामानुजाचार्य श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज का सत्संग
जैसा कि भगवान श्रीराम के अनन्यभक्त महाकवि तुलसी दास ने कहा- कलियुग केवल नाम आधारा, सुमिर-सुमिर नर उतरहिं पारा, इसलिए मानव जीवन तभी सार्थक माना जाता है जब किसी सतगुरू से नामदान लेकर प्रभु नाम का स्मरण किया जाए। ऐसी नामदान के साथ नाम स्मरण करने वाला गुरु मुखी कहलाता है और उसका ऐसा प्रयास सफल रहता है जबकि बिना गुरु के परमात्मा के स्मरण को मनमुखी कहा जाता है जो पूरी तरह से सार्थक हो, इसमें संदेह रह जाता है। कलियुग में पार ब्रह्म परमात्मा यानि श्रीमन्न नारायण का स्मरण किसी सतगुरु के शरणागत होकर ही करना चाहिए।
यह संदेश जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने चावड़ी बाजार गद्दी के स्थापना दिवस पर अपने संक्षिप्त सत्संग में दिया।
स्वामी पुरूषोत्तमाचार्य जी ने कहा कि नाम स्मरण कर सांसारिक कार्यकलापों-योग उपयोग करते हुए मोक्ष की प्राप्ति संभव है। हमारे शास्त्रों, ग्रंथों और वेदों में ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिनमें परमात्मा के अनन्य भक्तों ने ऐसा करके मानव जीवन में यशकीर्ति के साथ श्री हरि का सान्निध्य अर्थात मोक्ष प्राप्त कर जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति पाई है। ऐसे भक्तों में नरसी भगत, मीराबाई, संत कबीर आदि ऐसे अनेक महापुरुषों के उदाहरण हमारे सामने हैं। स्वामी जी ने कहा कि नाम स्मरण कर ईश्वर की प्राप्ति में काम, क्रोध, मद मोह, लोभ और ईर्ष्या बाधक है। इनका त्याग कर गुरु के वचनों का पालन करने से ईश्वर की प्राप्ति अर्थात मोक्ष मिलने का इतना सरल और उत्तम उपाय कोई हो नहीं सकता।
चावड़ी बाजार गद्दी के भाई ऋषि वर्मा और विजेन्द्र जैन आदि द्वारा आयोजित वार्षिकोत्सव में सैकड़ों गुरुभक्तों ने स्वामी जी के सत्संग का रसास्वादन के साथ विशाल भंडारे का प्रसाद भी ग्रहण किया।




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June 27th, 2010
Jai Guru Dev
Guru Poornima will be celebrated on 25th July 2010. Function will start from 8.30 AM in the morning and will go on full day. There will be Guru Poojan and every devotee will get ashirwad from Guru Maharaji. There will be a bhajan program and also different variety programs. Bhojan Prasad will be on full day.
For NRI Devotees Guru Poornima will be celebrated on 24th July 2010.
Jai Sriman Narayan
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