Sri Dev Darbaar

Archive for the 'Guru Vachan' Category

सेवा में ही आपको परम सुख मिलेगा।

गुरू की महिमा वेदों ने, पुराणों ने, स्मृतियों ने गाई है। बाबा नानकदेव जी ने तो बहुत ही सारतत्व में लिखा कि ‘सन्त की महिमा वेद न जाने, जेता सुना तेते बखाने’। सन्त और गुरू की महिमा को वेद भी नहीं जान पाये। जिनको वेद नहीं जान पाये तो सत्संग प्रेमियो! आप और हम विचार [...]

लक्ष्य से अलग न हों, अडिगता से डटे रहें

मेरे प्रेमियो! आप लक्ष्य को स्थाई बना लें। लक्ष्य को स्थाई बनाने का मेरा मतलब यह नहीं कि तुम मुझे ही मान लो, यह नहीं कहता; मैं यह भी नहीं कहता कि राम को ही मान लो; न कहता कि कृष्ण को मान लो। लक्ष्य उसे कहते हैं कि एक जगह पर हम लोग टिक [...]

हमें अपने सद्गुरु के वचनों पर पूर्ण विशवास होना चाहिए

- जय श्रीमन नारायण सदगुरु महान से भी महान है वह अपने भगतों पर हर समय अपनी कृपा बरसाते रहते है भटके हुए जीवो को रास्ते पर लाने के लिए संसार के सब दुख और कष्ट सहते है उनका केवल यही लक्ष्य होता है की अपने जीवो को सभी बन्धनों से मुक्त कराके उन्हें अपने [...]

We Must Have Faith On Our Guru Ji

एक बार नारद जी को अपनी तप-साधना पर बङा अहंकार हो गया, उनके अहंकार को दूर करने के लिए भगवान ने कहा- नारद तुम्हें गुरु धारण कर लेना चारिए । नारद जी बोले- मुझे गुरु धारण करने की क्या जरुरत है मैं तो अपने तपोबल से सीधा बैकुण्ठ जा सकता हूँ । भगवान बोले- जिसे [...]

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