कलियुग केवल नाम आधारा सुमिर-सुमिर नर उतरहिं पारा
चावड़ी बाजार गद्दी के वार्षिकोत्सव पर इन्द्रप्रस्थ एवं हरियाणा पीठाधीश्वर जगदगुरु रामानुजाचार्य श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज का सत्संग
जैसा कि भगवान श्रीराम के अनन्यभक्त महाकवि तुलसी दास ने कहा- कलियुग केवल नाम आधारा, सुमिर-सुमिर नर उतरहिं पारा, इसलिए मानव जीवन तभी सार्थक माना जाता है जब किसी सतगुरू से नामदान लेकर प्रभु नाम का स्मरण किया जाए। ऐसी नामदान के साथ नाम स्मरण करने वाला गुरु मुखी कहलाता है और उसका ऐसा प्रयास सफल रहता है जबकि बिना गुरु के परमात्मा के स्मरण को मनमुखी कहा जाता है जो पूरी तरह से सार्थक हो, इसमें संदेह रह जाता है। कलियुग में पार ब्रह्म परमात्मा यानि श्रीमन्न नारायण का स्मरण किसी सतगुरु के शरणागत होकर ही करना चाहिए।
यह संदेश जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ने चावड़ी बाजार गद्दी के स्थापना दिवस पर अपने संक्षिप्त सत्संग में दिया।
स्वामी पुरूषोत्तमाचार्य जी ने कहा कि नाम स्मरण कर सांसारिक कार्यकलापों-योग उपयोग करते हुए मोक्ष की प्राप्ति संभव है। हमारे शास्त्रों, ग्रंथों और वेदों में ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिनमें परमात्मा के अनन्य भक्तों ने ऐसा करके मानव जीवन में यशकीर्ति के साथ श्री हरि का सान्निध्य अर्थात मोक्ष प्राप्त कर जीवन-मरण के चक्र से मुक्ति पाई है। ऐसे भक्तों में नरसी भगत, मीराबाई, संत कबीर आदि ऐसे अनेक महापुरुषों के उदाहरण हमारे सामने हैं। स्वामी जी ने कहा कि नाम स्मरण कर ईश्वर की प्राप्ति में काम, क्रोध, मद मोह, लोभ और ईर्ष्या बाधक है। इनका त्याग कर गुरु के वचनों का पालन करने से ईश्वर की प्राप्ति अर्थात मोक्ष मिलने का इतना सरल और उत्तम उपाय कोई हो नहीं सकता।
चावड़ी बाजार गद्दी के भाई ऋषि वर्मा और विजेन्द्र जैन आदि द्वारा आयोजित वार्षिकोत्सव में सैकड़ों गुरुभक्तों ने स्वामी जी के सत्संग का रसास्वादन के साथ विशाल भंडारे का प्रसाद भी ग्रहण किया।
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This entry was posted on Wednesday, July 7th, 2010 and is filed under News and Events. Previous Post: Guru Poornima will be celebrated on 25th July 2010 »Next Post: गुरू पूर्णिमा पर्व पूजा अर्चना के साथ हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न »
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