गुरू पूर्णिमा पर्व पूजा अर्चना के साथ हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न
गुरू पूर्णिमा के तीसरे दिन भी हजारों की संख्या में धर्म प्रेमी गुरु भक्तों ने जगतगुरू पुरूषोत्माचार्य जी महाराज की पूजा अर्चना बड़े भाव और भक्ति के साथ नाच गानों के साथ मनाई।
गुरु महाराज ने अपने संदेश में कहा कि गुरु और गुरु स्थान की सेवा जो भक्त निस्वार्थ भाव, सच्चे मन और ईर्ष्या रहित करता है, वह भक्त गुरु का सबसे प्रिय होता है। गुरु के वचनों का बिना संकोच सच्चे मन से पालन करना चाहिए। गुरु स्थान और गुरु की निंदा करना और सुनना भगवान की निंदा करने के समान है। गुरु के वचन सदा अटल होते हैं। जिस तरह भीलनी ने गुरु के वचनों पर विश्वास कर कई जन्म अपनी कुटिया में प्रभु श्री राम की प्रतीक्षा में बिताए और अंत में श्री राम ने उन्हें दर्शन दिए और यहां तक की उनके झूठे बेर भी स्वीकार किए।
गुरु पूर्णिमा पर गुरु के प्रति कृतज्ञता का अर्पण करने वाले शिष्य सदा ही प्रसन्न रहते हैं। उनके भाव को समझने वाले गुरु सदा उन पर अपनी कृपा बरसाते हैं। लेकिन यह कृपा उन्हें ही मिलती है जो गुरु के वचनों का मान रखते हैं। गुरु के समान भाव रखने वाला शब्द कोई बना ही नहीं है जिस प्रकार मां शब्द का कोई मुकाबला नहीं कर सकता, इस शब्द में करूणा है, उसी तरह से गुरु शब्द में वात्सल्य भाव है।
गुरु महाराज ने आश्रम के सभी भक्तों और सेवादारों को गुरु पूर्णिमा पर आर्शीवाद और हार्दिक बधाई दी। विशाल भंडारे में सभी भक्तों ने भोजन प्रसाद पाया।
जय गुरु देव
जय श्रीमन्न नारायण
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This entry was posted on Friday, August 13th, 2010 and is filed under News and Events. Previous Post: कलियुग केवल नाम आधारा सुमिर-सुमिर नर उतरहिं पारा »Next Post: Shivratri Celebration – 8th August 2010 »
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