तीन दिवसीय गुरू पूर्णिमा उत्सव सम्पन्न
श्री सिद्धदाता आश्रम में गुरू पूर्णिमा उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें देश विदेश के सैँकड़ों भक्तों ने स्वामी श्री पुरुशोत्तामाचार्य जी महाराज से आर्शीवाद व प्रसाद ग्रहण किया। इस अवसर पर स्वामी पुरूषोत्तमाचार्य ने अपने गुरू व आश्रम के अधिष्ठाता स्वामी श्री सुदर्शनाचार्य महाराज की समाधि पर जाकर पुष्प चढ़ाए।
देश-विदेश से जुटे भक्तों ने गुरू के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए भजनों पर जमकर ठुमके लगाए। उनमें गुरू जी मानो या न मानो मैं तेरा हो गया, मेरी नैया लगा दो पार, सतगुरू मैं तेरी पतंग आदि अनेक सुमधुर भजन गाए गए।
स्वामी श्री पुरुशोत्तामाचार्य जी ने भक्तों को प्रवचन करते हुए कहा कि गुरू की शिक्षाओं को मानने वाले भक्तों का भगवान भी कुशलक्षेम देखते हैं। उन्होंने कहा कि अंधकार से प्रकाश में ले जाने वाले गुरू का वंदन हर हाल में आवश्यक है। गुरू वास्तव में भक्त के लिए भगवान की अदालत में सक्षम साक्ष्यों के आधार पर वकालत करते हैं। जिससे शिष्य के कष्टों का हरण हो जाता है। इसके बाद हुए प्रवचन कार्यक्रम में स्वामी पुरूषोत्तमाचार्य ने सेवादारों को कर्म और सद्सेवा का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि सेवा तीन प्रकार की होती है। यह तन, मन और धन से हो सकती है। तन से सेवा सर्वोत्तम मानी गई है, मन से सेवा साधारण है लेकिन धन से सेवा भी मानी जाती है।
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This entry was posted on Friday, July 29th, 2011 and is filed under News and Events. Previous Post: Swami Purushottamacharyaji Maharaj Satsang – 27th May 2011 »Next Post: Guru Jis Video Satsang on Guru Purnima »
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