Shri Narsingh Jayanti Celebrated on 16th May 2011
श्री लक्ष्मी नारायण दिव्या धाम श्री सिध्दाता आश्रम फरीदाबाद में नृसिंह भगवान जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई गयी। जगत गुरु स्वामी श्री पुरुशोत्तामाचार्य जी महाराज ने मधु, चन्दन, धूप व गंगा जल से वेद पाठियो द्वारा मन्त्रों के उच्चारण से नृसिंह भगवान का अभिषेक किया। इसके उपरांत नृसिंह भगवान की एक विशाल शोभा यात्रा बैंड बाजों, नगाडो व आतिशबाजी के साथ निकाली गयी। जिसमे हजारों भक्तों ने नृसिंह भगवान के जयकारे लगाये।
जगतगुरु स्वामी श्री पुरुशोत्तामाचार्य जी ने भजन संध्या में आये हजारों भक्तों को अपने सन्देश में कहा की भगवान नारायण ने हिरण्यकशिप के दैत्यराज का अत्याचार समाप्त करने के लिए , देवताओं की प्रार्थना पर भगवान नारायण, नृसिंह रूप में प्रगट हुए। हिरण्यकशिप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान का नाम लेने के कारण तरह तरह के कष्ट दिए लकिन असुर भाव नहीं छोड़ा। प्रह्लाद ने अपने पिता को समझाया की भगवान हर जगह है तो हिरण्यकशिप बोला की अगर भगवान हर जगह है तो इस खम्बे में क्यों नहीं दिखता और क्रोध में आकर खम्बे पर वार किया उसी समय खम्बे से नृसिंह भगवान प्रगट हुए उनका आधा शरीर सिंह का था और आधा मानव का ,और क्षण भर में ही नृसिंह भगवान ने हिरण्यकशिप की जीवन लीला समाप्त कर दी, भगवान ने प्रहलाद को मनोवांछित वरदान मांगने को कहा ,प्रहलाद बोले मुझे यही वरदान दो की मुझे कभी कोई इच्छा न हो नृसिंह भगवान ने तथास्तु कहकर प्रह्लाद को गोद में उठा लिया अंत में गुरुमहाराज जी ने कहा कि प्रह्लाद कि तरह कोई इच्छा न रखते हुए भगवान का नाम और इश्वर भक्ति ही मोक्ष का द्वार है।
जय गुरु देव
जय लक्ष्मीनर्सिंग भगवान
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This entry was posted on Tuesday, May 24th, 2011 and is filed under News and Events. Previous Post: Brahmutsav Celebration »Next Post: Swami Purushottamacharyaji Maharaj Satsang – 27th May 2011 »
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